ला मांचा का डॉन क्विक्सोट का आवरण, एस्पेरांतो-हिंदी संस्करण

मिगेल दे सर्वांतेस

ला मांचा का डॉन क्विक्सोट

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एस्पेरांतो में शीर्षक
Don Kiĥoto de la Manĉo
मूल प्रकाशन
1605
भाषाएँ
एस्पेरांतो और हिंदी
पृष्ठ
लगभग 306
संस्करण
संक्षिप्त

पुस्तक का सारांश

ला मांचा का एक उमरावज़ादा शूरवीरी क़िस्से इतने पढ़ चुका है कि डॉन क्विक्सोट के नाम से सड़कों पर निकल पड़ता है। एक दुबली घोड़ी पर सवार और बातूनी तथा व्यावहारिक किसान सांचो पांसा को साथ लिए वह सरायों को महल और पवनचक्कियों को दैत्य समझता है। उसकी मुहिमें मार खाने और ग़लतफ़हमियों में ख़त्म होती हैं, और उसका सहचर वादा किए गए द्वीप की बाट जोहता रहता है। उपन्यास आदर्शों और दुनिया के बीच की दूरी की, और इस बात की पड़ताल करता है कि एक आदमी का पागलपन उसका मज़ाक़ उड़ाने वालों के बारे में क्या बताता है। सर्वांतेस प्रहसन और विषाद को मिलाते हैं, ऐसी कथा में जो अपने टीकाकार ख़ुद गढ़ लेती है।

एक अंश पढ़ें: दोहरा स्तंभ

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