
गी द मोपासां
गोलमटोल
लेआउट
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- फ़्रेंच में शीर्षक
- Boule de Suif
- मूल प्रकाशन
- 1880
- भाषाएँ
- फ़्रेंच और हिंदी
- पृष्ठ
- लगभग 242
- संस्करण
- संपूर्ण
पुस्तक का सारांश
1870 के युद्ध के दौरान दस यात्री एक ही घोड़ागाड़ी में प्रशियाई सेना के कब्ज़े वाले रूआँ शहर से निकलते हैं: कुछ प्रतिष्ठित नागरिक, दो नन, एक लोकतंत्रवादी और एक वेश्या, जिसे गोलमटोल कहकर पुकारा जाता है। एक प्रशियाई अफ़सर उन्हें एक सराय में रोक लेता है और अपनी शर्तें रखता है, तब उन्हें पता चलता है कि उनके सिद्धांतों का असली मोल क्या है। वह युवती, जो अकेली थी जिसने उनके साथ अपना खाना बाँटा, हर तरह के दबाव का निशाना बन जाती है। इस कहानी के साथ पुस्तक में मोपासां की ग्यारह और कहानियाँ हैं, जिनका युद्ध से कोई संबंध नहीं: विवाह, बेवफ़ाई, पैसे और मध्यवर्ग के छोटे-छोटे समझौतों की कहानियाँ। यह संग्रह सामाजिक पाखंड पर मोपासां की सटीक और व्यंग्यपूर्ण दृष्टि को दिखाता है।



