आमोक का आवरण, जर्मन-हिंदी संस्करण

स्टेफ़ान ज़्वाइग

आमोक

लेआउट

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जर्मन में शीर्षक
Der Amokläufer
मूल प्रकाशन
1922
भाषाएँ
जर्मन और हिंदी
पृष्ठ
लगभग 128
संस्करण
संपूर्ण

पुस्तक का सारांश

एशिया से लौटते एक जहाज़ पर एक अनिद्रा-ग्रस्त यात्री रात में कथावाचक के पास आकर उससे गोपनीयता माँगता है। डच ईस्ट इंडीज़ की एक चौकी पर भेजा गया यह जर्मन डॉक्टर उस यूरोपीय स्त्री की भेंट का हाल सुनाता है जो उससे एक अवैध ऑपरेशन कराने आई थी। अभिमान और इच्छा दोनों से प्रेरित उसका इनकार उसे उस स्त्री के पीछे ऐसे दौड़ा देता है जैसे कोई आदमी पागल हो उठा हो। कहानी जुनून, ग़लत जगह लगाए गए स्वाभिमान और उष्ण कटिबंध में यूरोपीयों के अकेलेपन की पड़ताल करती है। ज़्वाइग इस इक़बालनामे को समुद्री यात्रा की एक रात में बंद कर देते हैं, जहाँ एक आदमी की दौड़ फिर कभी नहीं रुकती।

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