
स्टेफ़ान ज़्वाइग
शतरंज की कहानी
लेआउट
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- जर्मन में शीर्षक
- Schachnovelle
- मूल प्रकाशन
- 1942
- भाषाएँ
- जर्मन और हिंदी
- पृष्ठ
- लगभग 139
- संस्करण
- संपूर्ण
पुस्तक का सारांश
न्यूयॉर्क से ब्यूनस आयर्स जाते एक जहाज़ पर विश्व शतरंज चैंपियन मिर्को चेंतोविच यात्रा कर रहा है, एक मल्लाह का बेटा जिसे अपनी बिसात के बाहर लगभग कुछ नहीं आता। कथावाचक कुछ यात्रियों को उकसाकर उससे एक बाज़ी ख़रीदवाता है, जिसे यह उस्ताद बिना मेहनत जीत लेता है। तभी एक अजनबी, डॉक्टर बी., ऐसी चालें सुझाता है जो खेल का रुख़ बदल देती हैं, और फिर उन महीनों का हाल सुनाता है जब गेस्टापो ने उसे वियना के एक होटल-कमरे में अकेला रखा था, बिना किताब बिना काग़ज़। वहाँ चुराई गई बाज़ियों की एक पोथी ही उसका एकमात्र सहारा बनी। ज़्वाइग की यह अंतिम कृति एकांत, जुनून और इस बात की पड़ताल करती है कि टिके रहने के लिए मन अपने साथ क्या कर बैठता है।



