
सबाहत्तिन अली
फ़र कोट में मैडोना
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- तुर्की में शीर्षक
- Kürk Mantolu Madonna
- मूल प्रकाशन
- 1943
- भाषाएँ
- तुर्की और हिंदी
- पृष्ठ
- लगभग 345
- संस्करण
- संपूर्ण
पुस्तक का सारांश
एक साधारण-सा कर्मचारी, जिसे दया के कारण अंकारा की एक कंपनी में नौकरी मिलती है, राइफ़ एफ़ेंदी के साथ एक ही कमरे में काम करता है — एक अनुवादक, जिसके बारे में कोई कुछ नहीं जानता। जब समय से पहले बूढ़ा हो चुका यह आदमी बीमार पड़ता है, तो वह युवक से एक काली नोटबुक जला देने को कहता है, फिर एक रात के लिए उसे पढ़ने की अनुमति देता है। उसमें 1920 के दशक का बर्लिन और फ़र कोट पहने एक स्त्री का आत्मचित्र सामने आता है, जिसे देखने राइफ़ हर दिन जाता था, जब तक कि चित्रकार मारिया पूडर ने ख़ुद उससे बात नहीं की। यह उपन्यास प्रेम, संकोच और इस बात की पड़ताल करता है कि एक ही मुलाक़ात से जीवन में क्या बचा रहता है। सबाहत्तिन अली एक फीके जीवन के नीचे छिपे जुनून को संयम के साथ बयान करते हैं।