कार्ट
अस्सी दिनों में दुनिया की यात्रा

जूल्स वर्न

अस्सी दिनों में दुनिया की यात्रा

मूल प्रकाशन
1872
द्विभाषी संस्करण
12 जून 2026
पृष्ठ
469
कठिनाई
★☆☆
विधाएं
रोमांच, यात्रा वृत्तांत, विज्ञान कथा
अनुवाद का स्रोत
फ़्रेंच

पुस्तक का सारांश

फ़िलियास फ़ॉग, एक व्यवस्थित सज्जन, यह शर्त लगाता है कि वह अस्सी दिनों में दुनिया का चक्कर लगा सकता है। पासपार्टू, उसके साधन-संपन्न नौकर के साथ, वह कई महाद्वीपों में परिवहन के साधन और अप्रत्याशित घटनाओं का सामना करता है। लेकिन एक पुलिस इंस्पेक्टर उसका पीछा करता है, यह मानते हुए कि वह एक फ़रार अपराधी है। हर पड़ाव समय के ख़िलाफ़ एक दौड़ बन जाता है। उपन्यास साहसिकता, सटीकता और सस्पेंस को मिलाता है, दुनिया भर की एक लयबद्ध यात्रा प्रस्तुत करते हुए।

कथानक

An English gentleman’s wager. In London, Phileas Fogg, an English gentleman, bets £20,000, half his fortune, that he can travel around the world in 80 days. He leaves that very evening and must be back at his club by…

पुस्तक की दुनिया

By train, by ship, by elephant. The story begins in London in 1872. There are no planes yet: to go around the world, you take trains and steamships, and you cannot miss a single departure. So Phileas Fogg crosses…

लेखक

A novel born of new routes. Born in Nantes, a great port, Jules Verne loved ships all his life. In 1869 and 1870 the Suez Canal opened in Egypt, along with a railway across the United States and a line across India.…

पंक्ति-दर-पंक्ति समकालिक प्रारूप में द्विभाषी पद्धति के लाभ

मूल भाषा की हर पंक्ति के ठीक नीचे, उसी ऊँचाई पर उसका अनुवाद। आपको कभी ढूँढ़ना नहीं पड़ता कि आप कहाँ थे — नज़र एक पंक्ति नीचे उतरती है और वही वाक्य सामने आ जाता है जो आपने अभी पढ़ा। जिस भाषा पर पकड़ अभी कमज़ोर है, उसमें पूरी किताब पढ़ना इसी सज्जा से संभव होता है, बिना कड़ी टूटे, और दोनों पाठों की लगभग शब्द-दर-शब्द तुलना भी।

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