
ऑस्टिन बिडवेल
बिडवेल की यात्राएँ
ब्रुकलिन में जन्मा ऑस्टिन बिडवेल कम उम्र में वॉल स्ट्रीट के एक दफ़्तर में आता है, जहाँ उसे जुए और आसान पैसे का चस्का लग जाता है। 1873 में, अपने भाई जॉर्ज और दो साथियों के साथ, वह ग़ज़ब की दिलेरी वाला एक कारनामा कर दिखाता है: बैंक ऑफ़ इंग्लैंड से नक़ली हुंडियाँ स्वीकार करवा लेना। फिर आते हैं आयरलैंड, स्पेन और क्यूबा से होकर फ़रारी, मुक़दमा और जेल। ये एक असली ठग के संस्मरण हैं, जो उन्नीसवीं सदी के वित्त, पुलिस और जेलों का हाल भीतर से सुनाता है। “मैं” की ज़ुबानी, किसी रोमांच-कथा की तरह कही गई यह किताब, आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आसानी से पढ़ी जाती है।
डिजिटल€14.99
प्रिंट€60.99





