बचपन में मार्क ट्वेन मिसिसिपी पर भाप से चलने वाली नाव चलाने का सपना देखते थे। जवानी में वे नौसिखिए चालक बनते हैं और उन्हें नदी का हर मोड़ और हर रेतीला टीला ज़ुबानी याद करना पड़ता है, दिन में भी और रात में भी। बीस साल बाद वे नदी पर लौटते हैं और देखते हैं कि दुनिया कितनी बदल गई है।
यादें, क़िस्से और हास्य से भरे चित्र: इसी किताब में वे बताते हैं कि उनका क़लमी नाम, “मार्क ट्वेन”, कहाँ से आया, नदी की गहराई नापने वाले नाविकों की एक पुकार से।
जिए हुए क़िस्सों से भरी यह किताब, आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आसानी से पढ़ी जाती है।



















