दार्शनिक और सम्राट नीरो के सलाहकार सेनेका अपनों को बेहतर जीने में मदद के लिए लिखते हैं। इन छह संवादों में पहला कहता है कि ज़िंदगी छोटी नहीं है, बल्कि हम उसे बर्बाद करते हैं, जीने के सिवा हर काम में उलझे रहकर। बाक़ी संवाद मन की शांति, सुखी जीवन और अपमान के सामने ज्ञानी के धैर्य की बात करते हैं।
समय के इस्तेमाल और आत्म-संयम पर उनकी सलाहें आज के पाठक से भी बात करती हैं, और उनके बहुत से वाक्य याद रखने लायक़ हैं।
अनुवाद हमेशा आँखों के सामने रहता है, इसलिए आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आप यह महान क्लासिक पढ़ सकते हैं।



















