अचानक मरे अपने दादा के भाई के काग़ज़ात सँभालते हुए, एक आदमी को अजीब नोट्स, दुःस्वप्नों के ब्योरे और एक भयानक मूर्ति मिलती है। वह दुनिया के कोने-कोने से गवाहियाँ जुटाता है, और एक बहुत पुराने पंथ के सुराग़ तक पहुँचता है, जो समुद्र की गहराई में सोए एक प्राणी, क्थुलु, की पूजा करता है।
इस छोटी कहानी में डर किसी दिखने वाले दानव से नहीं, बल्कि उस सबसे आता है जिसका अंदाज़ा होता है। इसी रचना ने क्थुलु के मिथक को जन्म दिया, जिसे तब से खेलों और उपन्यासों में दोहराया गया है।
आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें यह कहानी एक ही बैठक में पढ़ी जाती है।



















