“मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, किंतु वह सर्वत्र बंधनों में जकड़ा हुआ है।” रूसो इसी बात से शुरू करते हैं और एक ऐसे संगठन का रूप खोजते हैं जिसमें हर कोई, सबसे जुड़कर भी, केवल अपना ही कहा माने। इस समझौते से वे एक सरल विचार निकालते हैं: सत्ता जनता की है, और क़ानून को सबकी इच्छा व्यक्त करनी चाहिए।
जो लोग सत्ता की नींव बल या ईश्वरीय अधिकार पर रखते थे, उनके उलट रूसो उसे नागरिकों की सहमति पर टिकाते हैं। इस छोटी किताब ने फ़्रांसीसी क्रांति को प्रेरणा दी, और यह आज भी यह समझने में मदद करती है कि लोकतंत्र और समानता के हमारे विचार कहाँ से आते हैं।
अनुवाद हमेशा आँखों के सामने रहता है, इसलिए आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आप यह बुनियादी पाठ पढ़ सकते हैं।



















