
फ्रांज़ काफ़्का
कायापलट
एक सुबह, ग्रेगोर साम्सा, एक मामूली फेरीवाला सेल्समैन, जागता है तो ख़ुद को एक विशाल कीड़े में बदला हुआ पाता है। अपने कमरे में बंद, वह अब काम नहीं कर सकता, और उसका परिवार, जो उसकी तनख़्वाह पर निर्भर था, उसके साथ जीना सीखने को मजबूर है। बेचैन करने वाली और स्याह हास्य से भरी यह छोटी कहानी दिखाती है कि एक आदमी का क्या बचता है जब उसका परिवार उसमें बस एक बोझ देखने लगता है। काफ़्का सरल और सटीक वाक्यों में लिखते हैं: आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें पहली बार कुछ पढ़ने के लिए यह रचना एकदम सही है।
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