“क़ब्र के पार से संस्मरण” का यह चौथा खंड 1815 से 1828 तक के सालों को समेटता है। शातोब्रियाँ इसमें “सौ दिन” का दौर बताते हैं, जो वे गेंट में राजा लुई अठारहवें के पास बिताते हैं, और वाटरलू की लड़ाई, जिसकी गड़गड़ाहट वे दूर से सुनते हैं। फिर सेंट हेलेना में नेपोलियन के निर्वासन और मौत की बारी आती है। शातोब्रियाँ अपने करियर के बारे में भी बताते हैं: बर्लिन और लंदन में राजदूत, फिर विदेश मंत्री।
घटनाओं के बीचोबीच खड़ा एक गवाह नेपोलियन के पतन और राजाओं की वापसी को भीतर से बताता है, और अपनी मित्र मादाम रेकामिए का चित्र खींचता है।
अनुवाद हमेशा आँखों के सामने रहता है, इसलिए आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आप ये मशहूर संस्मरण पढ़ सकते हैं।



















