युवा वेर्थर जर्मनी के एक शांत गाँव में आ बसता है। एक नृत्य-समारोह में उसकी मुलाक़ात शार्लोटे से होती है, जो एक उजली युवती है और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करती है, पर जिसकी बात किसी और से पक्की हो चुकी है। अपने दोस्त विल्हेल्म को लिखी चिट्ठियों में वेर्थर अपनी ख़ुशी, फिर अपनी पीड़ा सुनाता है।
इस छोटे उपन्यास ने गोएथे को रातोंरात मशहूर कर दिया। पूरा यूरोप वेर्थर का दीवाना हो गया, इतना कि नौजवान उसी की तरह नीला कोट और पीली बंडी पहनने लगे।
चिट्ठियों के रूप में लिखा यह उपन्यास, आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आसानी से पढ़ा जाता है।



















