कंगाल और मरने का फ़ैसला कर चुका युवा राफ़ाएल द वालांतें एक प्राचीन वस्तुओं की दुकान में जाता है, जहाँ दुकानदार उसे निशानों से भरी जानवर की एक खाल देता है। यह ताबीज़ अपने मालिक की हर इच्छा पूरी करता है, पर हर इच्छा पर सिकुड़ता जाता है, और उसके साथ मालिक की उम्र भी घटती जाती है। रातोंरात अमीर बनकर, राफ़ाएल को लंबी ज़िंदगी और अपनी इच्छाओं को जीने के बीच चुनना है।
बाल्ज़ाक इसमें अलौकिक को अपने ज़माने के पेरिस के चित्र के साथ मिलाते हैं। इस उपन्यास ने फ़्रांस में आज भी चलने वाला एक मुहावरा दिया: “शग्रीन की खाल की तरह सिकुड़ना”, यानी धीरे-धीरे घटते जाना।
अनुवाद हमेशा आँखों के सामने रहता है, इसलिए आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आप यह महान उपन्यास पढ़ सकते हैं।



















