बच्चे के जन्म के बाद थकी-हारी एक युवती को उसका डॉक्टर पति गर्मियों के लिए किराए पर लिए गए एक पुराने घर में ले आता है। उसे लिखने और काम करने से मना कर दिया जाता है, और वह अपने दिन एक कमरे में बिताती है जिसकी दीवारों पर भद्दा पीला वॉलपेपर लगा है। वह छिपकर डायरी लिखती है, और आख़िरकार उसे लगने लगता है कि दीवार के नमूनों के पीछे कोई आकृति हिल रही है।
शार्लट पर्किन्स गिलमैन ने ख़ुद आराम का ऐसा इलाज झेला था, और यह छोटी कहानी एक बेचैनी जगाती है जो हर पन्ने के साथ बढ़ती जाती है।
आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें यह कहानी एक ही बैठक में पढ़ी जाती है।



















