1845 में, हेनरी डेविड थोरो मैसाचुसेट्स के जंगलों में वॉल्डन तालाब के किनारे अपने हाथों से एक झोंपड़ी बनाते हैं, और वहाँ दो साल अकेले रहते हैं। वे फलियाँ उगाते हैं, मौसमों और जानवरों को निहारते हैं, और अपनी ज़रूरतों को सबसे ज़रूरी चीज़ों तक सीमित कर लेते हैं।
एक किताब जो यह सोचने को कहती है कि जीने के लिए हमें असल में किस चीज़ की ज़रूरत है। यह उन सबके लिए एक मिसाल बन गई है जो ज़्यादा सरल, ज़्यादा आज़ाद और प्रकृति के ज़्यादा क़रीब ज़िंदगी खोजते हैं।
अनुवाद हमेशा आँखों के सामने रहता है, इसलिए आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें आप इसे अध्याय-दर-अध्याय, अपनी रफ़्तार से पढ़ सकते हैं।



















