लॉरा अपने पिता के साथ स्टिरिया के एक सुनसान क़िले में अकेली रहती है, आस-पड़ोस से दूर। एक शाम, बग्घी की एक दुर्घटना के बाद कार्मिला नाम की एक अनजान लड़की उनके घर में रह जाती है: सुंदर, अलसाई हुई और लॉरा के लिए स्नेह से भरी। जल्द ही आसपास के गाँवों में लड़कियाँ मरने लगती हैं, और ख़ुद लॉरा अजीब सपनों से बेचैन होकर कमज़ोर पड़ने लगती है।
कार्मिला देर से उठती है और यह बताने से इनकार करती है कि वह कहाँ से आई है: उसका सारा रहस्य यहीं है। “ड्रैकुला” से पच्चीस साल पहले छपे इस छोटे उपन्यास ने पिशाचिनी की छवि को लंबे समय के लिए तय कर दिया।
लॉरा की ज़ुबानी, किसी राज़ की तरह कही गई यह कहानी, आप जो भाषा सीख रहे हैं, उसमें एक ही बैठक में पढ़ी जाती है।



















