
मिगेल दे सर्वांतेस
ला मांचा का डॉन क्विक्सोट
संक्षिप्त संस्करण
ला मांचा का एक उमरावज़ादा शूरवीरी क़िस्से इतने पढ़ चुका है कि डॉन क्विक्सोट के नाम से सड़कों पर निकल पड़ता है। एक दुबली घोड़ी पर सवार और बातूनी तथा व्यावहारिक किसान सांचो पांसा को साथ लिए वह सरायों को महल और पवनचक्कियों को दैत्य समझता है। उसकी मुहिमें मार खाने और ग़लतफ़हमियों में ख़त्म होती हैं, और उसका सहचर वादा किए गए द्वीप की बाट जोहता रहता है। उपन्यास आदर्शों और दुनिया के बीच की दूरी की, और इस बात की पड़ताल करता है कि एक आदमी का पागलपन उसका मज़ाक़ उड़ाने वालों के बारे में क्या बताता है। सर्वांतेस प्रहसन और विषाद को मिलाते हैं, ऐसी कथा में जो अपने टीकाकार ख़ुद गढ़ लेती है।
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